इस मामले में एक दिलचस्प बात ये है कि सीबीआई की टीम ने चिदंबरम को गिरफ्तार कर जिस इमारत (सीबीआई मुख्यालय) में रखा है उस बिल्ंडिंग के उद्घाटन के मुख्य अतिथियों में चिदंबरम भी शामिल थे जो तब देश के गृहमंत्री थे.
आमतौर पर यही माना जाता है कि मोबाइल का इस्तेमाल करना आंख और दिमाग़ के लिए नुकसानदेह हो सकता है लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि मोबाइल के इस्तेमाल से दांत भी टूट सकते हैं. एम्स में अभी तक इस तरह के नौ मामले आ चुके हैं जिसके बाद डॉक्टरों का कहना है कि लेटकर मोबाइल का इस्तेमाल करना ख़तरनाक हो सकता है.
नवभारत टाइम्स में प्रकाशित इस ख़बर के मुताबिक़, ऐसा करने से बच्चा डेंटल ट्रॉमा का शिकार हो सकता है, उसकी दांत टूट सकती है, होठ कट सकते हैं. अख़बार लिखता हैकि एक मोबाइल का वज़न 170 ग्राम से लेकर 250 ग्राम तक हो होता है, जब इतना भारी मोबाइल मुंह पर गिरेगा तो डेंट्रल ट्रॉमा का खतरा है.
दैनिक हिंदुस्तान की एक ख़बर के मुताबिक़, देश को पहला राफ़ेल विमान 20 सितंबर को मिल जाएगा. रक्षा अधिकारियों ने बताया कि पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार, केंद्र सरकार राजनाथ सिंह की अगुवाई में एक दल को फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल लेने भेज रही है.
पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने यूनिसेउ़ से बारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को गुडविल एंबेसडर के पद से हटाने की मांग की है. शिरीन ने प्रियंका पर जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार के निर्णय का सार्वजनिक तौर पर समर्थन करने का आरोप लगाया है. इस ख़बर को दैनिक जागरण ने प्रमुखता दी है.
बालाकोट हमले के दौरान मिग-21 से पाकिस्तान के एफ़-16 को निशाना बनाने वाले वीर चक्र विजेता विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने छह महीने बाद बुधवार को एक बार फिर से लड़ाकू विमान से उड़ान भरी. इस ख़बर को अमर उजाला ने प्रकाशित किया है.
इन चार-पांच सालों में उन्होंने कश्मीरी लोगों की ज़िन्दगी और उनके कई पहलुओं को कैमरे में क़ैद करने की कोशिश की हैं.
इतने सालों से कश्मीर में ईद मनाने वाली अवनि राय को दुःख है की भारतीय संविधान से 370 और 35A के ख़त्म होने के बाद कश्मीर में जो हालात पैदा हुए, उस कारण वो ईद में वहां नहीं जा पाईं. इसका उन्हें बेहद दुख है.
कश्मीर के बारे में एक किताब पर काम कर रही अवनि वहां की जनता को समझती हैं, इसलिए उनकी तकलीफ़ों और दुख पर भारतीयों का ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने एक ख़ास फ़ोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया है, जिसमें कश्मीरियों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की झलकियां मिलती हैं.
अवनि कहती है, "ये कहना ग़लत नहीं होगा कि मेरे काम का कश्मीर में चल रही राजनैतिक हलचल से कोई लेना-देना नहीं है. पर में सरल भाषा में कहना चाहूंगी की मेरी प्रदर्शनी चिंता है कश्मीरी लोगों के लम्बे दर्द और पीड़ा की, जिसकी आवाज़ सीमा और असमंजस भविष्य में दबी हुई है."
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