中国侨网7月25日电 据美国《世界日报》报道,近日,在美国做电召车司机的中国人林先生因查出癌症,在经济压力下选择搬走逃租,如今被房产公司追债。
2018年11月,林先生与朋友合租了一套位于纽约皇后区的房子,对方为正规房产公司,双方签订了一年合约。没想到,林先生以自己的名字签订租约后,朋友们却决定不租了,他只好自己承担所有房租。
据林先生说,自己来美国的时间不长,在中国的家人全靠他的收入为生。如今电召车行业也在紧缩,从业者压力巨大。最近他时常便血,就医后不幸被确诊为肠癌。一时间,养家负担与治疗费用已让他入不敷出,迫于无奈才收拾东西跑路。
律师表示,林先生若表明自己的身体状况,与房东商讨后表明自己无能力负担房租,房屋法庭还有一定机率对林先生免租,但直接搬出就变成了无理由欠租。而且,小房东可能因诉讼周期长、成本高等原因不予理会,但林先生租住的是大型房产公司旗下房产,有专门的律师长期负责审理此类案件。律师建议,林先生应与律师商讨偿还结果,不要逃避。
“刑事局”今天召开记者会,侦四大队副大队长王志成表示,日前获报,某经营租赁、贩卖超跑业者涉嫌以投资超跑、黄金,可短期获利为由诈骗。
“刑事局”查出,邓男在超跑业界具知名度,他日前疑投资失利,转卖名下多辆超跑,并过户给其他同业,事后再向同业租赁,并把超跑放在自己店面,若被害人上门询问汽车,邓男以付款后就可取车等为由,欺瞒被害人。
“刑事局”说,邓男事后再以保养、验车等为由,要求被害人开回超跑,实则放在店面兜售,若被害人想要取车,就由黑帮出面恐吓,并以同样手法诈骗其他被害人。
“刑事局”查出,自2018年起至2019年5月止,共9人受害,诈骗金额达新台币上亿元,此外,和邓男有投资关系的帮派份子道姓男子还涉嫌恐吓被害人。
“刑事局”掌握线索多月后,日前顺利逮捕邓男等人,并搜出现金22万余元,以及金融卡、本票等物。道男在警讯时否认涉案。
“刑事局”讯后依违反“组织犯罪条例”、诈骗、恐吓等罪嫌,把邓男等4人移送士林地检署侦办。
Thursday, July 25, 2019
Friday, July 19, 2019
राज्यपाल और सुप्रीम कोर्ट दोनों से टकराव की स्थिति में कर्नाटक सरकार
कर्नाटक इतिहास बनाने की कगार पर है क्योंकि सराकर के एक तरफ़ राज्यपाल वजुभाई वाला और दूसरी तरफ़ सुप्रीम कोर्ट है. जनता दल-सेक्यूलर और कांग्रेस की गठबंधन सरकार दोनों से टकराव की स्थिति में है.
इस गठबंधन सरकार के सामने इस समय दो चुनौतियां हैं.
पहली, राज्यपाल वजुभाई वाला ने विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार को निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी सरकार के विश्वास मत की प्रक्रिया शुक्रवार दोपहर 1.30 बजे तक पूरी हो जाए.
दूसरी चुनौती है सुप्रीम कोर्ट के बाग़ी विधायकों को लेकर दिए गए व्हिप की अनिवार्यता से स्वतंत्रता के आदेश से निपटना.
ये सभी बातें इशारा करती हैं कि जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन राज्यपाल से सीधे टकराव के मूड में है.
वहीं, सभी की नज़रें राज्यपाल वजुभाई वाला पर भी होंगी कि वो एसआर बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार विश्वासमत पर वोटिंग के लिए क्या क़दम उठाते हैं.
लेकिन, कर्नाटक के इस मामले के साथ ही उस युग का अंत हो जाएगा जिसमें ज़्यादातर सरकारें राजभवन या राज्यपाल के कमरे में चुनी जाती थीं.
वकीलों का कहना है कि क़ानूनी गलियारों में इस सवाल पर बहस हो रही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने विधायिका के विशेष क्षेत्र में हस्तक्षेप करके अपनी सीमा पार की है.
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा, ''संविधान में शक्तियों के विभाजन पर बहुत सावधानी बरती गई है. विधायिका और संसद अपने क्षेत्र में काम करते हैं और न्यायपालिका अपने क्षेत्र में. आमतौर पर दोनों के बीच टकराव नहीं होता. ब्रिटिश संसद के समय से बने क़ानून के मुताबिक़ अदालत विधायिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करती.''
सुप्रीम कोर्ट ने बाग़ी विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश दिया था जिसके मुताबिक़ स्पीकर को विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार करने या न करने या उन्हें अयोग्य क़रार देने का अधिकार है.
हालांकि, 'संतुलन' बनाने का प्रयास करते हुए कोर्ट ने 15 बाग़ी विधायकों विधानसभा की प्रक्रिया से अनुपस्थित रहने की स्वतंत्रता दे दी.
इसका मतलब ये है कि राजनीतिक पार्टियां सदन में अनिवार्य मौजूदगी के लिए जो व्हिप जारी करती हैं वो अप्रभावी हो जाएगा. इस पर गठबंधन सरकार के नेताओं ने आपत्ति ज़ाहिर की है.
कांग्रेस नेता सिद्दारमैया ने सदन में इस फ़ैसले पर कहा था, ''सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक राजनीतिक पार्टी के रूप में हमारे अधिकारों का हनन होता है.''
वह कहते हैं, ''उन्हें सिर्फ़ अपने अधिकारों की चिंता है. लेकिन, इस्तीफ़ा देने वाले विधायक का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है. एक बार इस्तीफ़ा देने के बाद व्हिप जारी नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक पार्टियों और विधायक दोनों के अधिकारों के बारे में जानता है, जिनके इस्तीफ़े में स्पीकर ने अनावश्यक रूप से देरी की है."
संजय हेगड़े को इस पर हैरानी होती है कि सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने 1994 के पांच न्यायाधीशों वाली पीठ के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाना सही समझा.
वह कहते हैं, ''पांच न्यायाधीशों वाली पीठ ने फ़ैसला दिया था कि कोई अंतरिम आदेश नहीं हो सकता लेकिन इस मामले में तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने बिना अंतिम सुनवाई के अंतरिम आदेश दे दिया. इसने एक ख़तरनाक मिसाल क़ायम की है."
बीवी आचार्य कहते हैं, "आप जानते हैं, अंतरिम आदेश के मामले में हमेशा कुछ अधिकार थोड़े बहुत प्रभावित होते हैं. विपक्षी दावे को संतुलित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश जारी किए हैं. विधायक राजनीतिक दल का बंधुआ मज़दूर नहीं है."
दूसरी तरफ़ हेगड़े का मानना है कि वह नहीं जानते कि देश की बाक़ी विधायिकाएं विधानसभाओं के सम्मेलन में 'सुप्रीम कोर्ट के इस अतिक्रमण' को किस तरह देखेंगी.
उन्होंने कहा, "ये ऐसा मामला है जिसमें कुछ भी साफ़ नहीं है. इसमें कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने जो स्थिति चुनी है उसके दूरगामी संवैधानिक मतलब निकाले जा सकते हैं."
राजनीतिक विश्लेषक और धारवाड़ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हरीश रामास्वामी भी मानते हैं कि "सुप्रीम कोर्ट के आदेश में संतुलन था. उसने किसी भी पक्ष को संतुष्ट नहीं किया. इससे टकराव की स्थिति बन गई. लेकिन व्हिप की परंपरा को भुला दिया. अगर आप लोगों के प्रतिनिधि हैं, तो उससे पहले एक राजनीतिक पार्टी के सदस्य थे. इस मूल प्रश्न को नजरअंदाज़ कर दिया गया है."
प्रोफेसर हरीश रामास्वामी कहते हैं, "यह सभी राजनीतिक दलों के अस्तित्व का सवाल बन गया है. बीजेपी कांग्रेस को ख़त्म करने की कोशिश कर रही है और दूसरी तरफ जेडीएस और कांग्रेस बीजेपी का मुक़ाबला करने की कोशिश कर रहे हैं. अकादमी से जुड़े किसी शख़्स के लिए इससे ज़्यादा दिलचस्प कुछ और नहीं हो सकता."
इस गठबंधन सरकार के सामने इस समय दो चुनौतियां हैं.
पहली, राज्यपाल वजुभाई वाला ने विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार को निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी सरकार के विश्वास मत की प्रक्रिया शुक्रवार दोपहर 1.30 बजे तक पूरी हो जाए.
दूसरी चुनौती है सुप्रीम कोर्ट के बाग़ी विधायकों को लेकर दिए गए व्हिप की अनिवार्यता से स्वतंत्रता के आदेश से निपटना.
ये सभी बातें इशारा करती हैं कि जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन राज्यपाल से सीधे टकराव के मूड में है.
वहीं, सभी की नज़रें राज्यपाल वजुभाई वाला पर भी होंगी कि वो एसआर बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार विश्वासमत पर वोटिंग के लिए क्या क़दम उठाते हैं.
लेकिन, कर्नाटक के इस मामले के साथ ही उस युग का अंत हो जाएगा जिसमें ज़्यादातर सरकारें राजभवन या राज्यपाल के कमरे में चुनी जाती थीं.
वकीलों का कहना है कि क़ानूनी गलियारों में इस सवाल पर बहस हो रही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने विधायिका के विशेष क्षेत्र में हस्तक्षेप करके अपनी सीमा पार की है.
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा, ''संविधान में शक्तियों के विभाजन पर बहुत सावधानी बरती गई है. विधायिका और संसद अपने क्षेत्र में काम करते हैं और न्यायपालिका अपने क्षेत्र में. आमतौर पर दोनों के बीच टकराव नहीं होता. ब्रिटिश संसद के समय से बने क़ानून के मुताबिक़ अदालत विधायिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करती.''
सुप्रीम कोर्ट ने बाग़ी विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश दिया था जिसके मुताबिक़ स्पीकर को विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार करने या न करने या उन्हें अयोग्य क़रार देने का अधिकार है.
हालांकि, 'संतुलन' बनाने का प्रयास करते हुए कोर्ट ने 15 बाग़ी विधायकों विधानसभा की प्रक्रिया से अनुपस्थित रहने की स्वतंत्रता दे दी.
इसका मतलब ये है कि राजनीतिक पार्टियां सदन में अनिवार्य मौजूदगी के लिए जो व्हिप जारी करती हैं वो अप्रभावी हो जाएगा. इस पर गठबंधन सरकार के नेताओं ने आपत्ति ज़ाहिर की है.
कांग्रेस नेता सिद्दारमैया ने सदन में इस फ़ैसले पर कहा था, ''सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक राजनीतिक पार्टी के रूप में हमारे अधिकारों का हनन होता है.''
वह कहते हैं, ''उन्हें सिर्फ़ अपने अधिकारों की चिंता है. लेकिन, इस्तीफ़ा देने वाले विधायक का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है. एक बार इस्तीफ़ा देने के बाद व्हिप जारी नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक पार्टियों और विधायक दोनों के अधिकारों के बारे में जानता है, जिनके इस्तीफ़े में स्पीकर ने अनावश्यक रूप से देरी की है."
संजय हेगड़े को इस पर हैरानी होती है कि सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने 1994 के पांच न्यायाधीशों वाली पीठ के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाना सही समझा.
वह कहते हैं, ''पांच न्यायाधीशों वाली पीठ ने फ़ैसला दिया था कि कोई अंतरिम आदेश नहीं हो सकता लेकिन इस मामले में तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने बिना अंतिम सुनवाई के अंतरिम आदेश दे दिया. इसने एक ख़तरनाक मिसाल क़ायम की है."
बीवी आचार्य कहते हैं, "आप जानते हैं, अंतरिम आदेश के मामले में हमेशा कुछ अधिकार थोड़े बहुत प्रभावित होते हैं. विपक्षी दावे को संतुलित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश जारी किए हैं. विधायक राजनीतिक दल का बंधुआ मज़दूर नहीं है."
दूसरी तरफ़ हेगड़े का मानना है कि वह नहीं जानते कि देश की बाक़ी विधायिकाएं विधानसभाओं के सम्मेलन में 'सुप्रीम कोर्ट के इस अतिक्रमण' को किस तरह देखेंगी.
उन्होंने कहा, "ये ऐसा मामला है जिसमें कुछ भी साफ़ नहीं है. इसमें कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने जो स्थिति चुनी है उसके दूरगामी संवैधानिक मतलब निकाले जा सकते हैं."
राजनीतिक विश्लेषक और धारवाड़ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हरीश रामास्वामी भी मानते हैं कि "सुप्रीम कोर्ट के आदेश में संतुलन था. उसने किसी भी पक्ष को संतुष्ट नहीं किया. इससे टकराव की स्थिति बन गई. लेकिन व्हिप की परंपरा को भुला दिया. अगर आप लोगों के प्रतिनिधि हैं, तो उससे पहले एक राजनीतिक पार्टी के सदस्य थे. इस मूल प्रश्न को नजरअंदाज़ कर दिया गया है."
प्रोफेसर हरीश रामास्वामी कहते हैं, "यह सभी राजनीतिक दलों के अस्तित्व का सवाल बन गया है. बीजेपी कांग्रेस को ख़त्म करने की कोशिश कर रही है और दूसरी तरफ जेडीएस और कांग्रेस बीजेपी का मुक़ाबला करने की कोशिश कर रहे हैं. अकादमी से जुड़े किसी शख़्स के लिए इससे ज़्यादा दिलचस्प कुछ और नहीं हो सकता."
Monday, July 1, 2019
G20峰会:贸易战阴云下,习近平与安倍认同促进“自由公平贸易”
在日本大阪举行的G20峰会前一天,中国国家主席习近平与日本首相安倍晋三举行会谈,双方同意努力促进自由公平的贸易体系。
习近平“原则上”同意明年访问日本。目前,中国和日本都在分别同美国进行贸易谈判,美国以关税威胁其主要贸易伙伴,以扭转特朗普所称的损害美国经济的不公平状况。
去年10月安倍晋三访问中国,庆祝《中日和平友好条约》缔结40周年,标志着双边关系长达七年之久的极冷状态的结束。
本次会谈开始时,安倍说,“自去年本人访问中国以来,日中关系已经完全回归正常轨道。在这个日本从‘平成’进入‘令和’的新时代,中国也迎来建国70周年的重要年份,希望能与习近平主席携手开启日中新时代。”
安倍还说,“在明年春天樱花盛开的时节,我们希望能够邀请习主席作为国宾访问日本,让日中关系再上一个新台阶。”
本次会谈,安倍和习近平同意继续致力于多边自由贸易协议,包括区域全面经济合作伙伴关系协定(RCEP)和“日本-中国-韩国自贸协议”。
谷口智彦向BBC中文表示,维持基于开放的贸易体制的规则很重要,这个规则曾使日本在战后时代获益,随后是“亚洲四小龙”,韩国、台湾、新加坡和香港,但它的最终受益者不是别人,而是中国。
特朗普就任后的多项贸易保护主义政策,不仅打击中国,也打击了日、欧、加、墨等国,促使这些国家推进与美国以外的国家建立双边关系。
今年4月日本的出口额已连续第五个月下降,部分归因于对中国芯片制造设备出口的下滑,凸显中美贸易战给日本经济带来的威胁。
路透社称,特朗普的政策给日本带来双重伤害,一方面抑制了日本对中国的出口,另一方面由于对美国汽车出口受限的担忧,使日本的贸易依赖型经济面临下滑风险。
在这一背景下,中国和日本都表示要尽快签订“区域全面经济合作伙伴关系协定”(RCEP)和“日本-中国-韩国自贸协议”。
香港中文大学商学院管理学系教授牧野成史(Shige Makino)曾向BBC中文表示,推进这些协议体现出日本坚定的政治意图,即大力推动自由贸易多边框架,消除美国单边主义的需求。
“区域全面经济合作伙伴关系协定”包括东盟十国、中日韩、印度及澳洲,将覆盖世界近一半人口和近三分之一贸易量,协定提倡成员国互相开放市场,形成区内经济一体化,希望整合共同市场吸引外资,提高区内国家在国际市场的竞争力。
习近平“原则上”同意明年访问日本。目前,中国和日本都在分别同美国进行贸易谈判,美国以关税威胁其主要贸易伙伴,以扭转特朗普所称的损害美国经济的不公平状况。
去年10月安倍晋三访问中国,庆祝《中日和平友好条约》缔结40周年,标志着双边关系长达七年之久的极冷状态的结束。
本次会谈开始时,安倍说,“自去年本人访问中国以来,日中关系已经完全回归正常轨道。在这个日本从‘平成’进入‘令和’的新时代,中国也迎来建国70周年的重要年份,希望能与习近平主席携手开启日中新时代。”
安倍还说,“在明年春天樱花盛开的时节,我们希望能够邀请习主席作为国宾访问日本,让日中关系再上一个新台阶。”
本次会谈,安倍和习近平同意继续致力于多边自由贸易协议,包括区域全面经济合作伙伴关系协定(RCEP)和“日本-中国-韩国自贸协议”。
谷口智彦向BBC中文表示,维持基于开放的贸易体制的规则很重要,这个规则曾使日本在战后时代获益,随后是“亚洲四小龙”,韩国、台湾、新加坡和香港,但它的最终受益者不是别人,而是中国。
特朗普就任后的多项贸易保护主义政策,不仅打击中国,也打击了日、欧、加、墨等国,促使这些国家推进与美国以外的国家建立双边关系。
今年4月日本的出口额已连续第五个月下降,部分归因于对中国芯片制造设备出口的下滑,凸显中美贸易战给日本经济带来的威胁。
路透社称,特朗普的政策给日本带来双重伤害,一方面抑制了日本对中国的出口,另一方面由于对美国汽车出口受限的担忧,使日本的贸易依赖型经济面临下滑风险。
在这一背景下,中国和日本都表示要尽快签订“区域全面经济合作伙伴关系协定”(RCEP)和“日本-中国-韩国自贸协议”。
香港中文大学商学院管理学系教授牧野成史(Shige Makino)曾向BBC中文表示,推进这些协议体现出日本坚定的政治意图,即大力推动自由贸易多边框架,消除美国单边主义的需求。
“区域全面经济合作伙伴关系协定”包括东盟十国、中日韩、印度及澳洲,将覆盖世界近一半人口和近三分之一贸易量,协定提倡成员国互相开放市场,形成区内经济一体化,希望整合共同市场吸引外资,提高区内国家在国际市场的竞争力。
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